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परिचय :
जीवन में खेलों का खास महत्व होता है। हर किसी का कोई न कोई प्रिय खेल होता है, जिसे वह बहुत आनंद से खेलता है। मेरा सबसे प्रिय खेल सांप सीढ़ी है। जो सभी बच्चों को बहुत पसंद आता है। यह घर के अंदर खेला जाने वाला खेल है। यह एक बहुत ही आसान और सस्ता खेल है। इस खेल को सांप सीढ़ी के बोर्ड, गोटियों व पासे की सहायता से खेला जाता है। जिसके लिए चार अलग-अलग लाल, पीले, नीले व हरे रंगों की गोटियाँ होती हैं।
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| सांप सीढ़ी | saamp sidhi game |
सांप सीढ़ी के बोर्ड पर 1 से 100 तक अंक खानों में लिखे होते हैं, और बहुत सारे साँप व सीढ़ियाँ बनी होती हैं। इसे अधिक से अधिक चार व्यक्ति खेल सकते हैं। इस खेल में सांप काटता है तो नीचे आते हैं और सीढ़ी पर ऊपर चढ़ते हैं। इस प्रकार उतार चढ़ाव होते रहते हैं। प्रत्येक खिलाड़ी एक रंग की केवल एक गोटी से खेलता है। साथ ही पासे पर 1 या 6 अंक आने पर खेल शुरू होता है। जो खिलाड़ी सबसे पहले 100 अंक तक पहुँच जाता है, वह खेल जीत जाता है। सांप सीढ़ी का खेल बहुत मजेदार होता है और इसे बार- बार खेलने का मन करता है।
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| सांप सीढ़ी | saamp sidhi game |
इतिहास :
10वीं शताब्दी भारत में एक खेल बहुत खेला जा रहा था। इसे 'मोक्षपातम्', 'परम् पदम्' या 'ज्ञान चौपड़' कहते थे। जिससे सांप सीढ़ी की उत्पत्ति हुई। 10वीं शताब्दी के पौराणिक भारतीय लेखों में ज्ञान चौपड़ के बारे में बताया गया है। कि वह ज्यादातर रंगे हुए कपड़े मतलब पातस पर खेला जाता था। यह खेल मूल रूप से 72 खाने का हुआ करता था।
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| सांप सीढ़ी | saamp sidhi game |
इसे खेलने के लिए पासे फेंके जाते थे, और अंकों के हिसाब से खानों की शुरुआत से मोहरे धीरे-धीरे ऊपर तक जाती थी। रास्ते में अगर मोहरे सांप के मुंह वाले खाने पर पहुंचती है, तो वह सीधे सांप के पूछ वाले आखरी खाने पर पहुंच जाती थी। जीतने के लिए मोहरों को सभी सांपों को पार करके आखरी खाने तक पहुंचना पड़ता था।
मोक्षपातम् आज की सांप सीढ़ी से काफी अलग था। जैसे उस समय खेल में सीढ़ी नहीं बल्कि अच्छे सांप, रस्सी या तीर होते थे, और ज्यादातर खानों में अच्छे और बुरे कर्मों के बारे में लिखा होता था। मतलब अच्छे काम आपको जल्दी आगे बढ़ा सकते हैं, और बुरे कर्म किए कराए पर पानी फेर सकते हैं। इससे यह पता चलता है की खेल का असली मुद्दा काफी आध्यात्मिक था। आप अच्छे-अच्छे कर्म बटोर कर जल्द से जल्द मोक्ष पा सकते हैं।
19वीं शताब्दी के अंत में इसी ज्ञान चौपड़ को अंग्रेजों ने ब्रिटेन में प्रस्तावित किया। जहां उन्होंने इसके खेलने के तरीके को तो बनाए रखा, लेकिन आध्यात्मिक ज्ञान को नष्ट कर दिया। इस खेल के आरंभिक धार्मिक गुणों और दोषों का खात्मा करके इसे केवल दो रचनात्मक चित्र मैं बदलकर सिर्फ सांप और सीढ़ी से जोड़ दिया।
इतना ही नहीं सांप और सीढ़ी की संख्या को भी बराबर कर दिया गया। जहां मूल गेम में सीढ़ी की तुलना में अधिक सांप थे, जो इस बात का प्रतीक था कि अच्छाई बनाएं रखने के मुकाबले बुराई का शिकार होना ज्यादा आसान है। भारत में उत्पन्न यह खेल आज भी उतना ही लोकप्रिय है। आज के समय में यह खेल मोबाइल ऐप के रूप में मौजूद है। जिसे आप कभी भी कहीं भी खेल सकते हैं।
निष्कर्ष :
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| सांप सीढ़ी | saamp sidhi game |
सांप सीढ़ी का खेल बोर्ड पर खेला जाने वाला खेल है। सामान्यतः यह खेल बच्चों में बहुत लोकप्रिय है। इस खेल का आविष्कार भारत में हुआ था। भारत में इसे 'मोक्षपातम्', 'परम् पदम्' या 'ज्ञान चौपड़' कहते थे। पहले इसका इस्तेमाल बच्चों को हिन्दू धर्म के मूल सिद्धान्तों की शिक्षा देने के लिए किया जाता था।
अंग्रेजों ने इसे 'स्नेक्स् ऐण्ड लैडर्स्' नाम दे दिया। ऐसा माना जाता है कि इसका आविष्कार 13वीं शताब्दी के सन्त ज्ञानेश्वर ने किया था। किन्तु कुछ सूत्रों के अनुसार इसकी जड़ें द्वितीय शताब्दी ईसापूर्व तक जाती हैं।
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