हॉकी | Hockey information in hindi | hockey india league

परिचय :


हॉकी एक लोकप्रिय खेल है। जिसको विश्व भर के सभी देशों द्वारा खेला जाता है। हॉकी खेल की लोकप्रियता क्रिकेट खेल के जैसे ही दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। इस खेल को 600 ईसा पूर्व के दौरान प्राचीन यूनान में खेला जाता था।

पहली बार वर्ष 1908 में हॉकी को ओलंपिक खेलों में शामिल कर लिया गया था। उस वर्ष केवल आयरलैंड, स्कॉटलैड, इंग्लैण्ड, वैल्स, जर्मनी तथा फ्रांस द्वारा ही इस खेल को खेला गया था।

हॉकी | Hockey information in hindi | hockey india league
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हॉकी का इतिहास :


हॉकी भारत में वर्षों पहले से खेला जाने वाला प्राचीन खेल है। यह हॉकी की छड़ी (स्टिक) और बॉल के साथ खेला जाता है। यह 1272 ईसा पूर्व से पहले आयरलैंड में और 600 ईसा. पूर्व के दौरान प्राचीन यूनान में खेला जाता था। हॉकी के बहुत से रुप है; जैसे मैदानी हॉकी, आइस हॉकी, स्लेज हॉकी, रोलर हॉकी, सड़क हॉकी, आदि। आजकल, मैदानी हॉकी को आमतौर पर, खेला जाता है। आइस हॉकी, मैदानी हॉकी के बिल्कुल विपरीत है, जो कनाडा और उत्तरी अमेरिका के बर्फीले मैदानों में खेली जाती है।

पुराने जमाने में इस खेल को खेलने के लिए एक साधारण गेंद होती थी और एक लकड़ी की छड़ी होती थी। जो कि वर्तमान हॉकी स्टिक की तरह मुड़ी हुई नहीं होती थी। वर्तमान हॉकी से मिलता जुलता खेल पहले इंग्लैंड में ही खेला जाता था।

इंग्लैंड से ही हॉकी में नियमों और कायदों का विकास हुआ था। लेकिन पुराने जमाने में अगर कोई खिलाड़ी 14 मीटर दूर से गोल करता था तब उसे गोल नहीं माना जाता था। हालांकि अब नियमों में सुधार करके इस नियम को बदल दिया गया है।

हॉकी खेल की बढ़ती हुई लोकप्रियता को देखते हुए 1886 में हॉकी एसोसिएशन की स्थापना हुई। इसके बाद तो हॉकी खेल में एक नई जान आ गई थी क्योंकि इसके बाद प्रत्येक देश द्वारा इस खेल को अपनाया जाने लगा था।

भारत में हॉकी का भविष्य :


a group of people playing field hockey
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जैसा कि हम सभी जानते हैं कि वास्तव में हॉकी के खेल का भारत में स्वर्णकाल के बाद अच्छा समय अब बीत गया है। यह हॉकी में रुचि और हॉकी के योग्य खिलाड़ियों की कमी के साथ ही भविष्य में इस खेल को नियमित रखने के लिए युवाओं को आवश्यक सुविधाओं की कमी के कारण हुआ है। ऐसा लगता है कि यह कभी भी खत्म नहीं होगा और हॉकी के लिए लोगों के प्यार, आदर और सम्मान के कारण हॉकी का स्वर्ण युग वापस आएगा। यद्यपि, हॉकी के स्वर्ण युग को भारत में वापस लाने के लिए भारतीय सरकार के द्वारा अधिक प्रयासों, लगन और समर्थन की आवश्यकता है। भारतीय हॉकी लीग, हॉकी टीमों को बढ़ाने के लिए कुछ प्रभावशाली रणनीतियों को लागू करने की योजना बना रही है।

भारत का हॉकी खेल में योगदान :


भारत का हॉकी के खेल में बहुत बड़ा योगदान है। भारत में हॉकी की लोकप्रियता क्रिकेट खेल की तरह ही है। यहां पर हॉकी के खिलाड़ियों को सम्मान की नजरों से देखा जाता है। भारत में हॉकी की बढ़ती हुई लोकप्रियता को देखते हुए 1885-86 हॉकी क्लब की स्थापना कोलकाता में की गई थी।

भारतीय खिलाड़ियों ने हॉकी खेल में पहली बार 1928 के एम्सटर्डम में खेले गए ओलंपिक से अपना पहला कदम रखा था। उस वर्ष भारतीय टीम ने स्वर्ण पदक जीता था। इसके बाद तो भारतीय टीम ने हॉकी खेल में स्वर्ण पदक की झड़ी लगा दी थी क्योंकि 1928 से 1956 के बीच खेले गए ओलंपिक में भारत ने 6 स्वर्ण पदक जीते थे। इस युग को भारत का स्वर्ण काल युग कहा जाता है। भारतीय हॉकी खेल के इतने अच्छे प्रदर्शन के कारण सभी देश के लोग भारतीय खिलाड़ियों को सम्मान की नजरों से देखने लगे थे। भारत को स्वर्ण पदक जिताने वाले खिलाड़ियों में सबसे महत्वपूर्ण खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद थे। जिन्होंने भारतीय हॉकी खेल को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया था।

1936 की भारतीय हॉकी खेल के कप्तान मेजर ध्यानचंद को हॉकी का जादूगर भी कहा जाता है, क्योंकि वह इतनी तेजी से गोल करते थे इतनी तेजी से कोई गोल नहीं कर पाता था। और आज तक उनका यह रिकॉर्ड कोई भी नहीं तोड़ पाया है।

हॉकी के स्वर्णिम युग के उत्कृष्ट खिलाड़ियों के नाम कुछ इस प्रकार है मेजर ध्यानचंद, धनराज पिल्लै, बाबू निमल, बलबीर सिंह, गगन अजीत सिंह, लेस्ली क्लॉडियस, अजीत पाल सिंह, अशोक कुमार, ऊधम सिंह, मोहम्मद शाहिद आदि थे।

इन्हीं खिलाड़ियों के कारण भारत को हॉकी का सम्राट कहा जाता है। इसी कारण भारत द्वारा हॉकी खेल को भारत का राष्ट्रीय खेल घोषित किया गया था।

हॉकी खेल के प्रकार :


विभिन्न देशों में विभिन्न प्रकार से हॉकी का खेल खेला जाता है। जैसे आइसलैंड में आइस हॉकी खेली जाती है। उसी प्रकार अन्य देशों में बैंडी, मैदानी हॉकी, स्लेज हॉकी, रोलर हॉकी, आइस हॉकी, स्ट्रीट हॉकी, सड़क हॉकी, मेज़ हॉकी, रिंक हॉकी, वायु हॉकी, शिन्नी, जल हॉकी आदि है।

हॉकी खेल के नियम :


two girls playing field hockey
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1. हॉकी 15-15 मिनट के चार क्वार्टर में खेला जाता है।

2. अगर मैदान में किसी खिलाड़ी के 5 मीटर के दायरे में कोई अन्य खिलाड़ी हो तो वह खिलाड़ी अपनी हॉकी स्टिक को 18 इंच से ऊपर नहीं उठा सकता है, और अगर कोई खिलाड़ी ऐसा करता है तो इसे "हाई बैक लिफ्ट" कहां जाता है। इसके बाद अंपायर सिटी बजाकर फ्री हिट का इशारा करता है।

3. अगर हॉकी खेलते समय गेंद किसी खिलाड़ी के पैर या जूते से टकरा जाए तो उसे "कैरीड फाउल" कहते है। इसके बाद अंपायर सिटी बजाकर फ्री हिट का इशारा करता है।

4. हॉकी खेलते समय गेंद को जोर से मारकर उछाल नहीं सकते हैं। ऐसा करने पर "रेज्ड बॉल फाउल" माना जाता है। और अंपायर द्वारा फ्री हिट दी जाती है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हॉकी बॉल को उछाल कर पास नहीं किया जा सकता। अगर किसी खिलाड़ी को गेंद को उछाल कर अपनी टीम के खिलाड़ी को पास करना है, तो उसे देखना होगा कि दूसरे खिलाड़ी के पास कोई अन्य खिलाड़ी नहीं है। और साथ ही उसके पास भी कोई अन्य खिलाड़ी नहीं होना चाहिए।

5. हॉकी के मैदान में आमतौर पर गेंद को छूने की मनाही होती है। लेकिन अगर हवाई शॉट मारा गया हो तो गेंद को कैच लिया जा सकता है। लेकिन इसमें भी एक नियम है, जो भी खिलाड़ी गेंद को कैच लेता है उसको तुरंत गेंद को अपने स्टिक पर रखना होता है।

6. हॉकी के मैदान में अगर 2 टीम हॉकी खेल रही है। तो अगर अंपायर को ऐसा लगता है, कि खिलाड़ी आपस में लड़ रहे हैं या फिर कोई दुर्घटना हो सकती है। तो अंपायर सिटी बजाकर डेंजरस प्ले का इशारा करता है, और फ्री हिट मिल जाती है।

7. हॉकी खेल में गोल के आगे बनी वृत्ताकार लाइन के अंदर गोल होने से बचाने के लिए सिर्फ गोलची ही गोल होने से बचा सकता है। अगर अन्य कोई खिलाड़ी गोल होने से बचाने का प्रयास करता है। तो यह फाउल माना जाएगा और अंपायर "पेनल्टी स्ट्रोक" दे देगा, इसका मतलब गोलमुख के सामने दूसरी टीम के खिलाड़ी सिर्फ 7 गज से शॉट लेंगे और उसे बचाने के लिए खड़ा होगा सिर्फ आपका गोलची।

8. हॉकी में खिलाड़ियों द्वारा गंभीर गलती करने पर अंपायर द्वारा तीन प्रकार के कार्ड दिखाए जाते है। इनका मतलब इस प्रकार है-

पीला कार्ड :

यह कार्ड खिलाड़ी से थोड़ी भूल चूक होने पर अंपायर द्वारा दिखाया जाता है। जिसके बाद खिलाड़ी को खेल से 2 मिनट के लिए बाहर निकाल दिया जाता है।

हरा कार्ड : 

यह कार्ड खिलाड़ी को मध्यम श्रेणी की भूल होने पर दिखाया जाता है, जिसके बाद खिलाड़ी को खेल से 5 मिनट के लिए बाहर निकाल दिया जाता है।

लाल कार्ड : 

यह कार्ड खिलाड़ी से बड़ी गलती होने पर दिखाया जाता है जिसके बाद खिलाड़ी को मैच से बाहर कर दिया जाता है।

हॉकी खेलने के लिए आवश्यक उपकरण :


हॉकी खेलने के लिए वैसे तो ज्यादा उपकरणों की आवश्यकता नहीं होती है। लेकिन जो खिलाड़ी प्रोफेशनल रूप से हॉकी खेलते है उनके लिए हॉकी किट होनी आवश्यक है - पिंडली पैड, मोजे, स्केटस, कंधो के पैड्स, कोनी का गद्दा, गर्दन गार्ड, हॉकी दस्ताने, पूर्ण पिंजरे के साथ हेलमेट, मुँह रक्षक, हॉकी की छड़ी, सुरक्षात्मक कप ( पुरुषों के गुप्तांग की रक्षा के लिए कप), गेंद।

हॉकी को सुरक्षित रूप से खेलने के लिए रुख उपकरणों की आवश्यकता होती है जिनके नाम, हैलमेट, नेक (गर्दन) गार्ड, कंधे के पैड, घुटनों के पैड, कोहनी के पैड, कप पॉकेट के साथ जैक्सट्रैप और सुरक्षात्मक कप, हॉकी की छड़ी, और एक गेंद।

कैसे खेली जाती है हॉकी :


हॉकी खुले मैदान में खेले जाने वाला खेल है। इस खेल को खेलने के लिए प्रत्येक टीम में 11 खिलाड़ी होते है। और इसमें 92 मीटर लंबा और 52 से 56 मीटर चौड़ा मैदान होता है। जिस को दो बराबर भागों में दोनों टीम के खिलाड़ियों के लिए मैदान को बराबर भागों में बांट दिया जाता है।

फिर अंपायर द्वारा टॉस किया जाता है। कि कौन सी टीम पहले खेलेगी। फिर मैदान के दोनों सिरों पर गोल मारने के लिए गोल बने होते है। यह खेल कुछ हद तक फुटबॉल की तरह ही है।

इस खेल को कुल 60 मिनट तक खेला जाता है। जिसमें 15-15 मिनट के 4 क्वार्टर होते है। कुछ वर्षों पहले तक इस खेल की समय अवधि 70 मिनट होती थी। जिसमें 35-35 मिनट के दो पड़ाव में इस खेल को खेला जाता था।

खेल प्रारंभ होने के पश्चात खिलाड़ियों द्वारा नियमों का पालन करते हुए एक दूसरे के विपरीत गोल करने होते है। जो भी टीम 60 मिनट की समय अवधि में अधिक गोल करती है, उस टीम को विजयी घोषित कर दिया जाता है।

हॉकी खेलने के लाभ :


1. हॉकी खेलने से शरीर स्वस्थ और तंदुरुस्त बना रहता है।
2. इस खेल को खेलने से शारीरिक विकास के साथ-साथ मानसिक विकास भी होता है।
3. हॉकी खेलने से सोचने समझने की शक्ति बढ़ जाती है।
4. इस खेल को खेलने के कारण बच्चों में एकाग्रता बढ़ती है। जिससे पढ़ाई करने में उन्हें कोई बाधा नहीं होती है।
5. हॉकी का खेल खेलने से हाथों व पैरों की मांसपेशियां मजबूत हो जाती है।
6. हॉकी खेलने से शरीर में अत्यधिक पसीना आता है। जिसके कारण शरीर की सारी गंदगी पसीने के रूप में बाहर निकल जाती है।
7. इस खेल को खेलने से बच्चों में बीमारियां होने का खतरा कम हो जाता है।
8. यह खेल एक टीम के रूप में खेला जाता है। जिसके कारण जो भी लोग इसे खेलते हैं, उनमें भाईचारे की भावना उत्पन्न होती है।
9. यह खेल खेलना जितना सरल लगता है उतना ही खतरनाक भी है। इसलिए जो भी व्यक्ति खेल को खेलते हैं, उनमें साहस और आत्मविश्वास की भावना अपने आप विकसित हो जाती है।
10. जो भी व्यक्ति हॉकी खेलता है। वह कभी भी मोटापे का शिकार नहीं होता है।
11. इस खेल को खेलने से शरीर हृष्ट-पुष्ट हो जाता है।
12. हॉकी का खेल खेलने से कार्य क्षमता में बढ़ोतरी होती है और आलस्य नहीं होता है।

महिला हॉकी की स्थापना :


two women playing field hockey
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पुराने जमाने में महिलाओं को हॉकी खेलने की मनाही होती थी। क्योंकि उस समय विक्टोरियाई युग चल रहा था। जिसमें महिलाओं के खेल खेलने पर प्रतिबंध था। लेकिन इस सब के बावजूद महिलाओं में हॉकी खेलने के प्रति लोकप्रियता बढ़ती जा रही थी। और 1895 से महिला हॉकी टीम द्वारा मैत्री प्रतियोगिताओं में भाग लिया जाने लगा था। लेकिन 1970 के दशक तक महिला हॉकी टीम को अंतरराष्ट्रीय खेलों में खेलने की अनुमति नहीं दी गई थी। समय बदलने के साथ ही वर्ष 1974 में हॉकी के पहले महिला विश्वकप का आयोजन किया गया था। और इसकी बढ़ती हुई लोकप्रियता को देखते हुए वर्ष 1980 में महिला हॉकी को ओलंपिक में भी शामिल कर लिया गया। भारत में लगातार महिला हॉकी खिलाड़ियों को प्रोत्साहन मिल रहा है। जिसके कारण पिछले कुछ दशकों में महिला हॉकी टीम द्वारा विश्व स्तर पर अच्छा प्रदर्शन रहा है।

भारत का राष्ट्रीय खेल हॉकी :


हॉकी कई देशों में खेला जाने वाला एक सबसे लोकप्रिय और दिलचस्प खेल है। यह भारत का राष्ट्रीय खेल चुना गया है। हालांकि, इसके लिए किसी भी प्रकार की आधिकारिक घोषण नहीं की गई है। इस खेल में दो टीमें होती हैं। और दोनों टीमों में 11 - 11 खिलाड़ी होते हैं। एक टीम के खिलाड़ियों का लक्ष्य दूसरी टीम के खिलाफ हॉकी के प्रयोग से विरोधी टीम के नेट पर गेंद मारकर अधिक से अधिक गोल बनाना होता है। हमारे देश ने छ: ओलंपिक स्वर्ण पदक और लगातार विभिन्न मैच जीतने के बाद हॉकी के क्षेत्र में एक शानदार रिकॉर्ड बना दिया है। जब भारत ने लगातार विभिन्न हॉकी मैच जीते थे, उस समय को हॉकी के स्वर्णिम दौर (1928 से 1956 के बीच के समय) के रूप में कहा जाता है। स्वर्णिम दौर के प्रसिद्ध खिलाड़ी मेजर ध्यानचन्द थे, और उनकी उत्कृष्ट उपलब्धियों की वजह से उन्हें हॉकी के जादूगर के रूप में जाना जाता है।

हॉकी के रूप :


हॉकी के अन्य रुप (जो हॉकी या अपने पूर्ववर्तियों से उत्पन्न हुए हैं) जैसे; एअर (हवा में) हॉकी, बीच (समुद्री तट) हॉकी, बॉल हॉकी, बॉक्स हॉकी, डेक ( बन्दरगाह) हॉकी, फ्लोर (जमीनी) हॉकी, फुट हॉकी, जिम हॉकी, मिनी हॉकी, रॉक हॉकी, पौंड हॉकी, पॉवर हॉकी, रौसेल हॉकी, स्टेकर हॉकी, टेबल हॉकी, अन्डर वॉटर हॉकी, यूनिसाइकल हॉकी आदि।

निष्कर्ष :


हॉकी भारत का राष्ट्रीय खेल है। ऐसा केवल कहा जाता है हालांकि, अभी तक इसकी आधिकारिक तौर पर कोई घोषणा नहीं हुई है। अब यह हमारी जिम्मेदारी है कि, हॉकी के स्वर्ण युग को वापस लाकर इसे आधिकारिक रुप से राष्ट्रीय खेल घोषित कराया जाए। इसके लिए बच्चों को स्कूल के समय से ही उन्हें सभी सुविधाओं को प्रदान करने के द्वारा उच्च स्तर पर बढ़ावा देने के साथ ही अध्यापकों, अभिभावकों और सरकार के द्वारा प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।

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