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[1] परिचय :
बहुत से खेलों की तरह कैरम बोर्ड भी एक खेल है। यह बहुत ही आसान खेल है, और इसे बच्चे, बूढ़े और, जवान सभी प्रेम से खेलते हैं। यह एक साथ वक्त बिताने का अच्छा तरीका है।
कैरम बोर्ड गेम एक बहुत ही लोकप्रिय खेल है। जो घर के अंदर खेला जाता है। कैरम बोर्ड एक चौकोर प्लाईवुड का होता है। इस बोर्ड के चारों कोनों में छेद होते हैं, जिन पर जाली लगी होती है। इस खेल को दो या चार खिलाड़ी खेल सकते हैं। यह खेल गोटियों व स्ट्राइकर के साथ खेला जाता है। इस खेल में 9 काली गोटियाँ, 9 सफेद गोटियाँ, 1 लाल गोटी व 1 स्ट्राइकर होता है। लाल गोटी को रानी गोटी कहते हैं।
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| कैरम बोर्ड | Carrom board |
इस खेल में एक काली गोटी के 10 अंक, एक सफेद गोटी के 20 अंक व लाल गोटी के 50 अंक होते हैं। स्ट्राइकर से मारकर गोटियों को कैरम बोर्ड के चारों कोनों पर बने छिद्रों में से किसी एक में डाला जाता है। कैरम बोर्ड पर दो लाइनें बनी होती हैं। उन दोनों लाइनों के बीच में स्ट्राइकर को रखकर गोटी पर निशाना लगाया जाता है। आखिर में हर एक खिलाड़ी के अंक जोड़े जाते हैं। जिस भी खिलाड़ी के अंक ज्यादा होते हैं, वह खेल जीत जाता है। कैरम एक बहुत ही अच्छा और मनोरंजन का खेल है।
कैरम भारतीय संगठन का टेबलटॉप गेम (टेबल के ऊपर खेला जाने वाला खेल) है। यह खेल भारतीय उपमहाद्वीप में बहुत लोकप्रिय है, और विभिन्न भाषाओं में विभिन्न नामों से जाना जाता है। दक्षिण एशिया में, कई क्लब कैरम के नियमित टूर्नामेंट आयोजित करते हैं। कैरम आमतौर पर परिवारों द्वारा, बच्चों सहित, और सामाजिक कार्यों में खेला जाता है। अलग-अलग क्षेत्रों में इस खेल के अलग-अलग नियम मौजूद हैं। यह 20वीं शताब्दी की शुरुआत में कैरम यूनाइटेड किंगडम और राष्ट्रमंडल में बहुत लोकप्रिय हो गया। कैरम शब्द का सीधा अर्थ है कोई भी स्ट्राइक और प्रतिक्षेप।
[2] कैरम का इतिहास :
कैरम बोर्ड गेम का आविष्कार भारतीय उपमहाद्वीप में हुआ था। प्रथम विश्व युद्ध के बाद यह बहुत लोकप्रिय हुआ। सन् 1935 के आस पास यह भारत के अलावा श्रीलंका में भी खेला जाने लगा। साथ ही इसके लिए आधिकारिक रूप से खेल प्रतियोगिताएं भी होनी शुरू हुई। सन् 1988 में इसका अंतरराष्ट्रीय रूप में विकास हुआ और "अंतरराष्ट्रीय कैरम महासंघ" कि स्थापना चेन्नई, भारत में हुई। इसी वर्ष इसके नियमों को प्रकाशित किया गया और यह धीरे धीरे अन्य देशों में लोकप्रिय होता हुआ, पूरी दुनिया में फैल गया।
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| कैरम बोर्ड | Carrom board |
अंतरराष्ट्रीय कैरम महासंघ (I.C.F.) की स्थापना सन् 1998 में चेन्नई, भारत में कि गई थी। खेल के भारतीय स्वरूप के लिए नियम सन् 1988 में प्रकाशित किए गए थे। उसी वर्ष आईसीएफ ने आधिकारिक तौर पर नियमों को संहिताबद्ध किया था। यह खेल पूरे दक्षिण एशिया में बहुत लोकप्रिय रहा है, मुख्य रूप से भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका, नेपाल और मालदीव में। यह खेल सऊदी अरब, कुवैत और बहरीन सहित अरब प्रायद्वीप के कई देशों में भी लोकप्रिय है। इसने यूनाइटेड किंगडम, यूरोप, उत्तरी अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया में कुछ लोकप्रियता हासिल की है।
"यूनाइटेड किंगडम कैरम महासंघ" (U.K.C.F.) का गठन सन् 1991 में लंदन में हुआ था। इस संगठन का मुख्य कार्य पूरे U.K. में कैरम के खेल को बढ़ावा देना और सभी प्रमुख अंतरराष्ट्रीय चैंपियनशिप में U.K. के खिलाड़ियों की भागीदारी सुनिश्चित करना है। यूकेसीएफ ने इंग्लैंड में 3 यूरो कप की प्रतियोगिताएं की है, और यूके के खिलाड़ियों के साथ टूर्नामेंट में शानदार सफलता हासिल की है। यूकेसीएफ ने वार्षिक आधार पर पूरे यूके में राष्ट्रीय चैंपियनशिप और लीग टूर्नामेंट आयोजित किए हैं।
"यूनाइटेड स्टेट्स कैरम एसोसिएशन", अमेरिका और कनाडा में होने वाली प्रतियोगिताओं पर रिपोर्ट करता है।
कैरम प्रेमियों के एक समूह ने सन् 2004 में एक साथ समूह बनाया और "पाकिस्तान कैरम फेडरेशन" (P.C.F.) की स्थापना की। पीसीएफ ने कैरम के खेल को बढ़ावा देने और सिखाने के लिए पूरे पाकिस्तान में क्लब बनाने का काम किया है।
"जर्मन कैरन फेडरेशन" की स्थापना सन् 1986 में कैरम के खेल को समर्थन देने के उद्देश्य से की गई थी। फेडरेशन पूरे जर्मनी में जर्मनी कैरम क्लब और टीमों की देखरेख करता है।
"इटालियन कैरम फेडरेशन" की स्थापना सन् 1995 में एक समूह द्वारा की गई थी।
"जापान कैरम फेडरेशन" की स्थापना सन् 1997 में हुई थी। सन् 2007 में वे टोक्यो में अपने नए मुख्यालय में चले गए। यह सन् 2004 से अब तक पूरे जापान में टूर्नामेंट, प्रदर्शन और प्रशिक्षण शिविर आयोजित करते हैं।
"बांग्लादेश कैरम फेडरेशन" का गठन सन् 1990 में किया गया था। हालांकि कैरम व्यापक रूप से पूरे बांग्लादेश में प्रचलित और लोकप्रिय है।
[3] कैरम के उपकरण :
यह खेल आमतौर पर प्लाईवुड से बने एक चौकोर बोर्ड पर खेला जाता है, जिसमें प्रत्येक कोने पर छेद बने होते हैं। मानकीकृत बोर्ड की लम्बाई और चौड़ाई 29 इंच (74 सेमी) होती है। इसकी सतह चौकोर और समतल होती है। बोर्ड के किनारों को लकड़ी की सीमा से बांधा जाता है। और प्रत्येक छेद के नीचे एक जाली लगी हुई होती है।
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| कैरम बोर्ड | Carrom board |
(1) मुख्य कैरम :
कैरम लकड़ी या प्लास्टिक की बनी, छोटी गोल गोटियों का इस्तेमाल करके खेला जाता है। इस खेल को मुख्य कैरम के रूप में जाना जाता है। मुख्य कैरम को इस तरह से बनाया जाता है। की इसमें आसानी से गोटियों पर निशाना लगाकर मारा जा सके। साथ ही इसकी सतह को सपाट और चिकना बनाया जाता है। सपाट और चिकना होने के कारण बोर्ड पर गोटियां, आसानी से सरलता के साथ फिसलती है। गोटियों को मारने के लिए एक स्ट्राइकर की आवश्यकता होती है। यह गोटियों की तुलना में बड़ा और भारी होता है। इस खेल में स्ट्राइकर से गोटियों को मारकर, बोर्ड के कोनों पर बने चार छेदों में से किसी एक छेद में गोटियों को डालना होता है। आमतौर पर स्ट्राइकर का वजन 35 ग्राम और व्यास 4.1 सेंटीमीटर होता है।
एक कैरम सेट में तीन अलग-अलग रंगों में 19 गोटियां (स्ट्राइकर शामिल नहीं) होती है। जिसमें 9 सफेद और 9 काली गोटियां होती है। इनके अलावा एक लाल रंग की गोटी होती है, जिसे रानी (queen) कहते हैं।
(2) कैरम पाउडर :
कैरम बोर्ड पर फिसलन बनाए रखने के लिए उस पर, एक विशेष प्रकार का बारीक पाउडर छिड़का जाता है। जिससे बोर्ड पर गोटियां सरलता से फिसलती है।
[4] कैरम के नियम :
I.C.F. कैरम के अंतरराष्ट्रीय नियमों को प्रख्यापित करता है। जिसे "The laws of carrom" कहते हैं।
(1) टॉस :
कैरम का खेल शुरू होने से पहले, खिलाड़ियों के क्रम को निर्धारित करने के लिए टॉस किया जाता है। प्रत्येक मैच शुरू होने से पहले, एक अंपायर एक हाथ में एक काली गोटी और दूसरे हाथ में एक सफेद गोटी को छिपाता है। इसके बाद खिलाड़ी अनुमान लगाते हैं। की कौन से रंग की गोटी किस हाथ में है? जो खिलाड़ी सही अनुमान लगाता है। वह टॉस जीत जाता है।
टॉस का विजेता पहले स्ट्राइकर से मारता है। और उसके पास सफेद रंग की गोटी होती है, छेदों में डालने के लिए। यदि टॉस का विजेता पक्ष बदलने का विकल्प चुनता है। तो हारने वाले को पहले स्ट्राइक करना पड़ता है। केवल जीतने वाला खिलाड़ी ही सुनिश्चित करता है। की खेल कौन शुरू करेगा? जो खिलाड़ी पहले खेल शुरू करता है। उसके पास सफेद गोटी होती है। और दूसरे के पास काली गोटी होती है।
(2) गोटियों के नियम :
कैरम में खेल के दौरान, यदि कोई खिलाड़ी अपनी गोटी को छेद में डाल देता है। तो उसे दोबारा से गोटियों को मारने का मौका दिया जाता है। अगर वह खिलाड़ी अपनी गोटी को छेद में नहीं डाल पाता है। तो दूसरे खिलाड़ी को स्ट्राइकर दिया जाता है। ताकि वह भी अपनी गोटी को छेदों में डाल सके। इसी तरह यह खेल चलता जाता है। और जो खिलाड़ी अपनी सारी गोटियों को सबसे पहले अंदर डालता है, वह मैच जीत जाता है।
कैरम में रानी गोटी को छेद में डालने के बाद, जब खिलाड़ी को दूसरा मौका दिया जाता है। तब रानी को कवर करने के लिए खिलाड़ी अपनी एक और गोटी को डालता है। लेकिन यदि खिलाड़ी अपनी गोटी को नहीं डाल पाता अर्थात रानी को कवर नहीं कर पाता है। तो रानी गोटी को कैरम बोर्ड के केंद्र में वापस रख दिया जाता है।
खेल के दौरान, यदि खिलाड़ी स्ट्राइकर को छेद में डाल देता है। तो उसे दंड के रूप में अपनी एक गोटी कैरम बोर्ड के केंद्र में रखनी पड़ती है। बशर्ते उसने वह गोटी पहले ही डाल चुका हो। मतलब खिलाड़ी ने जो गोटी पहले ही छेद में डाल चुका हो, उसमें से एक गोटी बोर्ड के बीच में रखी जाती है।
[5] निष्कर्ष :
बहुत से खेलों की तरह कैरम बोर्ड भी एक खेल है। यह बहुत ही आसान खेल है। और इसे बच्चे, बूढ़े और जवान सभी प्रेम से खेलते हैं। यह एक साथ वक्त बिताने का अच्छा तरीका है। कैरम के खेल के लिए घर से बाहर जाने की भी जरूरत नहीं है। यह बहुत पुराना खेल नहीं है। बताया जाता है, की इस खेल की शुरुआत मुम्बई में सन् 1929 के आसपास हुई थी। अंतरराष्ट्रीय कैरम फेडरेशन (आई सी एफ) का गठन सन् 1988 में चेन्नई में हुआ था। इसी साल कैरम के अंतरराष्ट्रीय नियमों पर भी मुहर लगाई गई थी। धीरे-धीरे यह अन्य देशों में लोकप्रिय होता हुआ, पूरी दुनिया में फैले गया।
कैरम बोर्ड, प्लाइवुड या हार्ड बोर्ड पर खेला जाता है। यह चौकोर होता है और इसके चारों कोनों पर छेद होते हैं। इन चारों छेदों में ही कैरम खेलने वाले गोटी डालते हैं। कैरम के बीचोबीच एक बड़ा सा व्रत होता है। जिसकी गोलाई 15 सेंटीमीटर होती है। यह खेल 2, 3 या 4 खिलाड़ी खेल सकते हैं। इस खेल को कैरम गोटी और स्ट्राइकर के साथ खेला जाता है।
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