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परिचय :
लूडो सभी आयु एवं वर्गों के लोगो में बहुत लोकप्रिय खेल है। इस खेल को खेलने के लिए, किसी लंबे-चौड़े मैदान की आवश्यकता नहीं पड़ती है। बल्कि यह घर के एक छोटे-से कोने में भी खेला जा सकता है। इसके लिए विशेष उपकरणों की भी आवश्यकता नहीं पड़ती है। केवल एक गत्ते या प्लास्टिक का बोर्ड (जिसे लूडो-बोर्ड कहा जाता है), गोंटियां तथा पासे की आवश्यकता पड़ती है।
बोर्ड के चारों कोनों पर चार रंग (लाल, पीला, हरा, नीला) के खाने बने होते हैं। इन पर खिलाड़ी अपनी-अपनी गोटियां रखते हैं। बोर्ड के अन्य स्थान पर गोंटियों के चलने का रास्ता बना होता है। इस रास्ते पर स्थान-स्थान पर स्टोप बने होते हैं। ये स्टोप अपना विशेष महत्व रखते हैं, क्योकि यदि खिलाड़ी इस स्थान पर अपनी गोटी ले आए, तो अन्य खिलाड़ी उसे पीट नहीं सकता है।
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| लूडो गेम | Ludo in hindi |
लूडो गेम में प्रत्येक खिलाड़ी चार गोंटियों से खेलता है। इस प्रकार कुल 16 गोंटिया होती है। गोंटियों के साथ-साथ एक पासा होता है, जिसका आकार घनाकार होता है। इसमें छः पृष्ठ होते हैं। पासे का इस खेल में विशेष महत्व होता है। इसी की सहायता से यह खेल आगे बढ़ता है।
गोंटियां कितनी आगे चलनी है, इसका निर्धारण यह पासा ही करता है। यह प्लास्टिक या लकड़ी का बना होता है। इसके पृष्ठों पर क्रमशः एक, दो, तीन, चार, पांच और छ: बिंदु बने होते हैं। जब पासा फेंका जाता है, तो इसका एक पृष्ठ अवश्य ऊपर रहता है। ऊपर वाले पृष्ठ पर जितने बिंदु अंकित रहते हैं, उतने ही खाने गोटी आगे चलती है।
लूडो में आमतौर पर चार खिलाड़ी खेल सकते हैं। इसमें खेलने की दो स्थितियाँ होती है। चारों खिलाड़ी अलग-अलग भी खेल सकते हैं, या दो-दो खिलाड़ियों के जोड़े बनाकर भी। दोनों की विधियां थोड़े-से अंतर के साथ लगभग एक जैसी होती है। जोड़े बनाकर खेलने में एक पक्ष के दोनों खिलाड़ी आमने-सामने बैठते हैं। सभी चारों खिलाड़ी अपनी गोटियों का चयन कर लेते हैं, जो रंगो के आधार पर होता है।
लूडो का इतिहास :
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| लूडो गेम | Ludo in hindi |
लूडो एक ऐसा खेल है, जिसका नाम सुनते ही हम बचपन की यादों में चले जाते हैं। यह एक ऐसा खेल है, जिसे बच्चे ही नहीं बल्कि हर उम्र के लोग खेलना पसंद करते हैं। पहले जब स्मार्टफोन नहीं हुआ करते थें। तब लोग अपने दोस्तों और परिवार वालों के साथ खाली वक्त में यह गेम खेला करते थे। पर जैसे-जैसे टेक्नोलॉजी का विकास हुआ, वक्त के साथ यह गेम भी बदल गया। लूडो एक पारंपरिक खेल है।
आपको यह जानकर हैरानी होगी, कि लूडो खेल हजारों साल पुराना है। इसका एक लंबा इतिहास रहा है। और इसके विभिन्न नाम और स्वरूप भी इतिहास में दर्ज है। इस प्राचीन खेल का इतिहास बहुत ही रोचक है। बहुत से पश्चिमी देश दावा करते हैं, कि लूडो गेम का आविष्कार उन्होंने किया है। परंतु इस खेल का संबंध प्राचीन भारत से है। लूडो एक लैटिन भाषा का शब्द है। जिसका मतलब है, "I play"।
लूडो खेल कई देशों में प्रचलित है। और अलग-अलग नामों से जाना जाता है। भारत में इस खेल को "पचीसी" के नाम से जाना जाता है। ऐसा माना जाता है, कि पचीसी को 6वी शताब्दी में भारत में ही बनाया गया था। अगर हम इस खेल की जड़ों को ढूंढने जाएं तो हमारे सामने आती हैं, पौराणिक महाकाव्य महाभारत की वह घटना जिसमें पांडवों ने द्रौपदी को दांव पर लगा दिया था। लूडो को उस समय "चौपड़", "चौसर" और "पचीसी" के नाम से जाना जाता था। महाभारत के युद्ध का कारण इसी खेल को माना जाता है।
इसके अलावा सिर्फ महाभारत में ही नहीं बल्कि, हिंदू पौराणिक कथाओं में भी पचीसी का उल्लेख मिलता है। पचीसी से संबंधित कई देवी-देवताओं की कहानियां प्रचलित है। एक उदाहरण में, श्री कृष्ण यह खेल सत्यभामा के साथ खेलते हुए नजर आए हैं। एक मत तो यह भी है, कि यह खेल कैलाश पर्वत पर माता पार्वती, शिवजी के साथ खेला करती थी।
मध्य कालीन इतिहास में पचीसी खेल का सबसे बड़ा उल्लेख हमें मिलता है। 16वी शताब्दी में मुगल सल्तनत के सबसे प्रभावशाली राजा अकबर के दरबार में। उन्होंने फतहपुर सीकरी के दरबार में एक विशाल पचीसी के बोर्ड का निर्माण करवाया था। जहां वे अपनी दासियों को मोहरों/प्यादों के रूप में इस्तेमाल करते थें।
ब्रिटिश राज के दौरान इस खेल को कुछ अंग्रेजों ने भी सीख लिया था। सन् 1896 में इंग्लैंड में इसे "लूडो" के नाम से "अल्फ्रेड कोलियर" (Alfred Collier) ने पेटेंट करवाया था। यह पचीसी का ही एक आसान और रंगीन संस्करण था। लूडो गेम यूरोप और अमेरिका में बहुत लोकप्रिय हुआ। और आज के समय में लूडो को हजारों लोग खेलना पसंद करते हैं।
लूडो खेल के नियम :
1. यदि पासे में छ: आता है, तो खिलाड़ी को एक अतिरिक्त चाल मिल जाती है।
2. यदि गोटी स्टॉप पर रखी होती है या डबल हो गई होती है, तो अन्य कोई खिलाड़ी उसे पीट नहीं सकता है।
3. गोटियों के रास्ते पर स्थान-स्थान पर स्टोप बने होते हैं। ये स्टोप अपना विशेष महत्व रखते हैं, क्योकि यदि खिलाड़ी इस स्थान पर अपनी गोटी ले आए, तो अन्य खिलाड़ी उसे पीट नहीं सकता है।
4. यदि पासे में लगातार तीन बार छः आ जाए, तो खिलाड़ी की चाल समाप्त हो जाती है।
5. खिलाड़ी केवल छः आने पर ही अपनी गोटी खोल सकता है।
6. पासा फेंकने में डिब्बी का प्रयोग करना चाहिए। इससे निष्पक्षता बनी रहती है।
7. जब पासा फेंका जाता है, तो इसका एक पृष्ठ अवश्य ऊपर रहता है। ऊपर वाले पृष्ठ पर जितने बिंदु अंकित रहते हैं, उतने ही खाने गोटी आगे चलती है।
8. जो खिलाड़ी सबसे पहले अपनी चारों गोटियों को अंतिम घर में पहुंचा देता है। वह खिलाड़ी खेल जीत जाता है।
भारत में लूडो का महत्व :
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| लूडो गेम | Ludo in hindi |
लूडो खेलना सभी को बहुत पसंद है। यह एक बहुत ही प्रसिद्ध खेल है, जो सभी घरों में खेला जाता है। लूडो घर के अंदर खेले जाने वाला खेल है। यह बहुत ही सरल और आसान खेल है। इसके लिए एक गत्ते या प्लास्टिक के लूडो बोर्ड की आवश्यकता होती है। लूडो खेलने के लिए गोटियों और पासे का प्रयोग किया जाता है। इस खेल में कम से कम दो और अधिक से अधिक चार लोगों की आवश्यकता होती है।
लूडो गेम में लाल, पीले, नीले और हरे रंग के चार घर होते हैं। पासे में 1 से 6 तक के अंक होते हैं। पासे फेंकने पर जितने अंक आते हैं उतनी ही चाल, खानों में चलनी पड़ती है। पासे पर अगर 6 अंक आता है तो दुबारा पासा फेंकने का मौका मिलता है। इसमें एक दूसरे की गोटियाँ काटने का भी अवसर मिलता है।
अगर किसी की गोटी कट जाती है, तो वापस से गोटी की चाल शुरू से चलनी पड़ती है। जिस खिलाड़ी की भी चारों गोटियाँ सबसे पहले अंतिम घर में पहुँच जाती है, वही खेल जीत जाता है। लूडो का खेल दिमाग व मनोरंजन का खेल है। यह खेल सभी को बहुत पसंद आता है।
भारतीय बच्चों को लूडो गेम, अपने परिवार के साथ खेलना बहुत पसंद है। भारत में इस खेल को बहूत पसंद किया जाता है। बच्चे यह खेल ज्यादातर अपने भाई और बहनों के साथ खेलते हैं। साथ ही इस खेल को खेलते समय वह बहूत मस्ती भी करते हैं।
लूडो के तथ्य :
आज के समय में लूडो लोकप्रिय खेल इसलिए भी है, क्योंकि यह खेल दूसरे बाहर खेले जाने वाले (आउटडोर) खेल की तरह बिलकुल भी जोखिम वाला खेल नहीं है। इस खेल को घर में आसानी से सरलता के साथ खेल सकते हैं। लूडो गेम अत्यंत ही सस्ता और आसान खेल है। इस खेल को बहुत से लोग खेलना पसंद करते हैं, जैसे घर में मम्मी- पापा, बच्चे-बड़े और दादा-दादी आदि।
लूडो गेम 2, 3 या 4 लोग मिलकर खेल सकते हैं। इस खेल को खेलने के लिए एक गत्ते या प्लास्टिक के लूडो बोर्ड, पासे और गोटियों की आवश्यकता होती है। लूडो बोर्ड पर खानें बने होते हैं। जिन पर गोटियों को आगे बढ़ाया जाता है। लूडो में नीले, पीले, हरे और लाल रंग के चार घर बने होते हैं। और गोटियाँ भी इन्ही चार रंगों की होती है।
इन चारों घरों में चार-चार गोटियाँ रखी जाती है। लूडो के पासे में 1,2,3,4,5 और 6 अंक होते हैं। पासा फेंकने के बाद जो अंक आता है, खिलाड़ी वही अंक के हिसाब से उतना ही चाल चलता है। जो खिलाड़ी सबसे पहले विजेता घर में पहुंचता है, वह विजेता होता है। सही मायनों में यह खेल घर में खेले जाने वाला एक मजेदार इंडोर गेम है।
निष्कर्ष :
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| लूडो गेम | Ludo in hindi |
सभी इंडोर गेमों में, लूडो खेलना मुझे सबसे ज्यादा पसंद है। लूडो एक बहुत ही प्रसिद्ध खेल है। जिसे लगभग हर घर में खेलना पसंद किया जाता है। यह गेम बहुत सस्ता और खेलने में बहुत आसान है। लूडो गेम को छोटे-बड़े सभी लोग बहुत पसंद करते हैं। इस खेल को कम से कम दो लोग और ज्यादा से ज्यादा चार लोग खेल सकते हैं। यह खेल आउटडोर खेलों की तरह जोखिम वाला नहीं है। इस खेल में किसी तरह की चोट लगने की संभावना नहीं होती है। लूडो में एक गत्ते या प्लास्टिक का लूडो बोर्ड और 16 गोटियाँ, 1 पासा तथा एक डिब्बी होती है।
लूडो खेल को गोटियों तथा पासे की मदद से खेलते हैं। इस पासे में अधिकतम अंक 6 तथा न्युनतम अंक 1 होता है। पासे में पहले 6 अंक लाने वाला व्यक्ति पहले गोटी को आगे चलाता है। लूडो गेम में नीले, पीले, हरे और लाल रंग के चार घर होते हैं। इन चारों घरों में चार-चार गोटियाँ होती है। यह गोटियाँ भी नीले, पीले, हरे और लाल रंगों की होती है। इस प्रकार कुल 16 गोटियाँ गेम में होती है। लूडो बोर्ड में गोटियों के चलने के लिए खाने बने होते हैं। इस गेम को खेलने के लिए पासे को डिब्बी में डालकर फेकना पड़ता है।
लूडो गेम की शुरुआत में सभी गोटियाँ अपने-अपने घरों में होती है। पासे पर जितना अंक आता है, खिलाड़ी को उतने ही खाने तक, अपनी गोटी को आगे चलना पड़ता है। अपनी गोटी को मरने से भी बचाना पड़ता है। अगर किसी खिलाड़ी की गोटी मर गई, तो वो गोटी वापस अपने घर में चली जाती है। जिस खिलाड़ी की गोटी ज्यादा मरती है, उसके जीतने की संभावना उतनी ही कम हो जाती है। जो खिलाड़ी सबसे पहले अपनी सभी गोटियों को विजेता घर तक पहुंचाता है, वो खेल जीत जाता है।
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