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परिचय :
ताश का खेल आप लोगों ने कभी ना कभी तो जरूर खेला होगा, या आपने अपने आसपास के लोगों को ताश का खेल खेलते हुए; और अच्छे से मनोरंजन करते हुए जरूर देखा होगा। आजकल तो जादूगर भी ताश के पत्तों से अलग-अलग तरह के जादू करते हैं।
ताश का खेल इतना मजेदार और बेहतरीन होता है, कि जो इंसान ताश का खेल खेलने लग जाए तो उसको ताश के खेल की आदत लग जाती है। क्योंकि ताश का खेल खेलने में बहुत मज़ा आता है। लेकिन यह ताश आए कहां से? मतलब ताश का खेल कब शुरू हुआ और ताश के पत्ते सबसे पहले किसने बनाएं? और कैसे बनाएं?
तो दोस्तों यहां आप विस्तार से जानेंगे कि ताश के खेल का आविष्कार कैसे हुआ, साथ ही यह भी जानेंगे कि ताश का पूरा इतिहास क्या है। और ताश के पत्ते कहां से आए और किसने इन्हें शुरू किया।
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| ताश वाला गेम | ताश का गेम | ताश गेम |
आप लोगों की जानकारी के लिए यह बता देते हैं, कि ताश के 1 पैकेट में 52 पत्ते होते हैं। और यह सारे पत्ते 4 तरह के भागों में बंटे होते हैं। जिनको चिड़ी, हुकुम, पान और ईंट कहा जाता है। प्रत्येक भाग में 13 पत्ते होते हैं, और चारों भागों को मिलाकर कुल 52 पत्ते होते हैं।
ताश का इतिहास :
ताश के खेल की उत्पत्ति चीन में हुई थी। सन् 618-907 के दौरान चीन में "तांग" राजवंश हुआ करता था। तांग राजवंश में एक राजा थे, जिनका नाम "यीजोंग" (Xuanzong) था। जिनकी बेटी राजकुमारी "तोंगचांग" समय बिताने के लिए पेड़ के पत्तों को तोड़कर उनसे खेला करती थी। धीरे-धीरे चीन में सभी लोग पेड़ के पत्तों को ताश बनाकर खेलने लगे, और उन्होंने पेड़ के पत्तों पर अलग-अलग तरह के चित्र बनाकर खेलना शुरू कर दिया। फिर धीरे-धीरे पेड़ के पत्तों वाला यह खेल लोकप्रिय होने लगा और यूरोप तक फैल गया था।
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सन् 1400 के आसपास यूरोप के लोगों ने पेड़ के पत्तों की जगह समतल लकड़ी काटकर ताश के पत्ते बनाएं, और लकड़ी के टुकड़ों पर अलग-अलग तरह के चित्र बनाकर ताश खेलना शुरू कर दिया। लेकिन लकड़ी के यह ताश काफी भारी और खेलने में असुविधाजनक होते थें। इनसे खेलना मुश्किल होता था।
लेकिन धीरे-धीरे ताश 14वीं शताब्दी के अंत तक पूरे यूरोप में फैल चुका था। तो यूरोप के कुछ लोगों के मन में आया, कि ताश के पत्तों को कागज से बनाया जाना चाहिए। उनकी यह तरकीब काम कर गई, और वहां के लोगों ने 15वीं शताब्दी की शुरुआत में ही कागज के बने हुए ताश खेलना शुरू कर दिया।
16वीं शताब्दी में कागज के पत्तों का यह खेल दुनिया के कोने-कोने में फैल गया था। जैसे ही यह खेल फ्रांस में पहुंचा तो वहां के लोगों ने इसकी बनावट बदल दी, साथ ही फ्रांस के कुछ प्रसिद्ध निशान ताश पर छाप दिए गए। आज जो हम ईंट, पान, हुकुम और चिड़ी के निशान वाले पत्तों से खेलते हैं। वह फ्रांस की ही देन है। फिर वहां के लोगों ने धीरे-धीरे इतिहास के महान योद्धाओं की तस्वीरें ताश के पत्तों पर छापने शुरू कर दिए थे।
जैसे एक महान राजा "डेविड" (David) के नाम पर हुकुम का बादशाह बना दिया गया। पान का बादशाह "चार्ल्स" (Charles) के नाम पर, ईद का बादशाह "जूलियस सीज़र" (Julius Caesar) के नाम पर और चिड़ी का बादशाह "अलेक्जेंडर द ग्रेट" (Alexander the Great) के नाम पर बना दिया गया था।
ऐसे ही हुकुम, चिड़ी, पान और ईंट की रानियों के नाम भी उस समय की प्रसिद्ध रानियों के नाम पर पड़े। इसी प्रकार चिड़ी, पान, हुकुम और ईंट के गुलामों के नाम भी उस समय के प्रसिद्ध गुलामों के नाम से पढ़ें, और बचे हुए 10 छोटे पत्तों पर 1 से 10 तक की गिनती छाप दी गई। तब से लेकर आज तक हर भाग में 13 पत्ते होते हैं, और कुल 4 भागों में 52 पत्ते होते हैं।
तो दोस्तों इस तरह चीन से ताश का अस्तित्व सामने आया और ताश धीरे-धीरे पूरी दुनिया में फैल गया। साथ ही समय के साथ ताश की बनावट भी बदलती गई।
ताश के तथ्य :
ताश का खेल आपने भी कभी ना कभी जरूर खेला होगा। भारत ही नहीं बल्कि दुनिया के सभी देशों में ताश के पत्तों ने अपना जादू दिखाया है। लेकिन आप में से बहुत ही कम लोगों को ताश के रोचक इतिहास से जुड़े तथ्यों के बारे में पता होगा। तो जानते हैं ताश के महत्वपूर्ण तथ्य :
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(1) ताश के पूरे सेट को पैक (pack) या डेट (Deck) कहते हैं, और एक खेल के दौरान एक बार मैं एक खिलाड़ी द्वारा उठाए गए पत्तों के समूह को हैंड (hand) कहते हैं।
(2) सबसे पहले 19वीं शताब्दी में तांग राजवंश के दौरान चीन में ताश का खेल उत्पन्न हुआ था। तब तांग के राजा यीजोंग की बेटी राजकुमारी तोंगचांग समय बिताने के लिए पेड़ के पत्तों से खेला करती थी। इस खेल में एक ही पेड़ के पत्तों पर अलग-अलग तरह के चित्र बनाकर खेला जाता था। बाद में पत्तों की जगह कागज का इस्तेमाल होने लगा था।
(3) 14वीं शताब्दी में यूरोप में भी ताश खेला जाने लगा था। यूरोपीय ताश में 4 भाग थे - प्याले, सिक्के, तलवार और पोलो की छड़ी हुआ करते थे। प्रत्येक भाग में 10 नंबर वाले पत्ते और 3 तस्वीरों वाले पत्ते हुआ करते थे। इस तरह चारों भागों को मिलाकर कुल 52 पत्ते होते थें। उस समय तस्वीरों वाले पत्तों में राजा (Malik), उप-राजा (Naib Malik) और थानी नायब (Thani Naib) होते थें।
(4) 14वीं शताब्दी के अंत में ताश पूरे यूरोप में फैल गया था। उस समय ताश लकड़ी के बनाए जाते थें। यह काफी बड़े और महंगे होते थें। 15वीं शताब्दी में यूरोप में ताश के कई प्रकार के सेट हुआ करते थे।
(5) 16वीं शताब्दी तक दुनिया के अधिकांश भागों में ताश के 4 भाग पान, ईंट, चिड़ी और हुकुम का प्रयोग होने लगा था। जिनकी शुरुआत फ्रांस से हुई थी। इसके अलावा इन ताशों में तस्वीरों वाले पत्तों के नाम इतिहास में प्रसिद्ध महान राजा और रानिओं के नाम पर रखे गए थे।
(6) इज़रायल के महान राजा (बाइबल के राजा) 'डेविड' (David) के नाम पर हुकुम का बादशाह बना, पान के राजा का नाम 'चार्ल्स' (Charles), ईंट के राजा का नाम 'जूलियस सीजर' (Julius Caesar) और चिड़ी के राजा का नाम 'अलेक्जेंडर द ग्रेट' (Alexander the Great) के नाम से पड़ा।
साथ ही बेगमों की बात की जाए, तो हुकुम की रानी का नाम "पलास" (Pallas), पान की रानी का नाम "जूडिथ" (Judith), ईंट की रानी का नाम "रसैल" (Rachel) और चिड़ी की रानी का नाम "अर्जीनी" (Argine) के नाम पर रखा गया था। इसी प्रकार हुकुम का गुलाम "ऑजीर द डेन" (Ogier the Dane), पान का गुलाम "लाहीरे" (La Hire), ईंट का गुलाम "हेक्टर" (Hector) और चिड़ी का गुलाम "लेंस लॉट" (Lancelot) को प्रदर्शित करता है।
(7) शुरुआत में बादशाह ही सबसे बड़ा पत्ता माना जाता था। लेकिन बाद में सबसे छोटे पत्ते मतलब इक्के को विशेष महत्व दिया जाने लगा। इसलिए कभी-कभी कुछ खेलों में इक्का सबसे बड़ा पत्ता बन जाता था। लेकिन 18वीं शताब्दी के अंत में फ्रांसीसी क्रांति के दौरान यह विचार तेजी से फैल गया था।
(8) इंग्लैंड के राजा "जेम्स प्रथम" (James I) के शासनकाल में आमतौर पर हुकुम के इक्के पर ताश को बनाने वाले का विशेष प्रकार का चिन्ह दर्शाने का चलन शुरू हुआ। क्योंकि उस समय एक कानून था, जिसके तहत ताश पर निशान लगाना जरूरी था। जिससे यह साबित हो सके कि ताश के निर्माता द्वारा लगान/कर (Tax) का भुगतान कर दिया गया है।
(9) अगर आपने कभी ताश के पत्तों को ध्यान से देखा होगा, तो आपको पता होगा कि ताश के तस्वीरों वाले पत्तों में हुकुम के गुलाम, पान के गुलाम और ईंट के बादशाह का आधा चेहरा ही दिखाया जाता है। जबकि बाकी तस्वीरों वाले पत्तों में पूरे चेहरे दिखाएं गए हैं। जिस वजह से इन पत्तों को एक आँख (One Eyed) या काना भी कहा जाता है। इन पत्तों का आधा चेहरा ही क्यों बनाया गया? इसके बारे में किसी को कुछ नहीं पता है।
(10) ताश के पत्तों में पान का बादशाह एकमात्र ऐसा राजा है, जिसकी मूछें नहीं है। साथ ही उसने अपनी तलवार को अलग तरह से पकड़ा हुआ है, मानो वह खुद को ही नुकसान पहुंचा रहा है। इस वजह से उसे आत्मघाती राजा (suicide king) के नाम से भी जाना जाता है। हालांकि यह भी माना जाता है, कि वह अपने पीछे तलवार को छुपा रहा है। बिना मूछ का होने और पीछे तलवार छुपाने के कारण उसका नाम "द फॉल्स किंग" (the false king) मतलब झूठा राजा पड़ गया।
(11) ताश में ईंट के बादशाह के हाथ मैं कुल्हाड़ी होती है। जबकि बाकी राजाओं के हाथ में तलवार होती है। इसलिए ईंट के राजा को "द मैन विथ एक्स" (the man with axe) के नाम से भी जाना जाता है। और कुछ खेलों में काने गुलाम को (हुकुम, पान के गुलाम को) चोर और ईंट के बादशाह को सबसे बड़ा राजा माना जाता है।
(12) ताश के पत्तों में ईंट का गुलाम एकमात्र ऐसा गुलाम है। जो मुस्कुराता रहता है। इसलिए इसे "लाफिंग बॉय" (Laughing boy) भी कहते हैं। हुकुम का इक्का जो सबसे बड़ा पत्ता होता है ,उसे "कार्ड ऑफ डेथ" (Card of death) के नाम से भी जाना जाता है।
हुकुम की रानी आमतौर पर एक छड़ी रखती है। जिस वजह से इसे "बेडपोस्ट क्वीन" (Bedpost Queen) के नाम से भी जाना जाता है। इसके अलावा इसे "ब्लैक लेडी" (Black lady) के नाम से भी जाना जाता है। लेकिन आज-कल के नए पत्तों के सेट में सभी रानियों को उनके कपड़ों के अनुसार एक फूल के साथ चित्रित किया जाने लगा है।
ताश का जोकर :
दोस्तों दुनिया के सभी ताश के खेलों को मिला दिया जाए, तो आपको पता चलेगा कि ताश को लगभग 10000 तरीकों से खेला जा सकता है। ताश के पैकेट में "जोकर" क्यों होता है? जब हम आमतौर पर ताश का खेल खेलते हैं। तब हम जोकर को पूरी तरह से छोड़ देते हैं। हम जोकर को तभी इस्तेमाल करते हैं, जब हमारे पास से कोई पत्ता खो जाए। उस पत्ते की जगह पर, उसका नंबर जोकर के पत्ते पर लिखते हैं। और तभी हम जोकर का इस्तेमाल करते हैं।
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कई बार आप कुछ ताश के सेट को देखोगे, तो आपको उसमें जोकर नहीं मिलेगा। क्योंकि उनमें जोकर होता ही नहीं है। जोकर हमारे पास से खो जाए, तो किसी भी खेल में वह हमारी रुकावट नहीं बनता है। लेकिन फिर भी जोकर को क्यों इस्तेमाल किया जाता है? आखिर क्यों? सन् 1860 से पहले के पत्तों में जोकर का कोई भी नामोनिशान नहीं था। लेकिन सन् 1860 के बाद जोकर को ताश के पत्तों में उपयोग किया जाने लगा।
सन् 1860 में "यूचरे गेम" (Euchre game) बहुत ही लोकप्रिय खेल बन चुका था। यूचरे गेम में ब्रिटिश नियमों के मुताबिक एक इम्पीरियल बोवर (Imperial bower) नाम का पत्ता होता था, और यह पत्ता ताश के बाकी सभी पत्तों से प्रसिद्ध था। साथ ही यह पत्ता बाकी सभी पत्तों को आसानी से काट देता था। इसी की वजह से पत्तों के सेट में इम्पीरियल बोवर नामक पत्ता शामिल हुआ। बाद में यही पत्ता जोकर में बदल गया। अभी जो रम्मी, पोकर गेम खेला जाता है। उसमें एक या कई बार दो जोकर का इस्तेमाल करते हैं।
ताश खेलने के लाभ :
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ताश का खेल खेलने से हमें बहुत फायदे भी मिलते हैं। जैसे कि इससे हमारा मानसिक संतुलन और सोचने की क्षमता बढ़ती है। जो लोग गणित में कमजोर होते हैं। उन्हें भी ताश खेलने से लाभ होता है, क्योंकि कई ताश के खेलों में तुरंत सोचना और मन ही मन में गणित के सवाल करने की जरूरत पड़ती है।
आमतौर पर खिलाड़ी अनुमान लगाने पर भरोसा नहीं करते हैं। उन्हें ध्यान से सोचना पड़ता है, की सामने वाले खिलाड़ी के पास कौन सा पत्ता होगा। इससे हम हमारे मन को कई बार चुनौती देते हैं। जिससे हमारी मानसिक और भावनात्मक शक्ति बढ़ती है। जब हम हार जाते हैं, उस हार से हमें बहुत कुछ सीखने को मिलता है।
जब हम ताश खेलते हैं, तब कौन से पत्ते का इस्तेमाल किया गया है और कौन से पत्ते आना बाकी है। यह सब हमें याद रखना पड़ता है। इससे हमारी याद रखने की क्षमता मैं काफी सुधार आता है।
ताश के पत्तों को आपने एक बार पीसा/फेंटा, तो आप या सारी दुनिया मिलकर भी उसी तरह से बिल्कुल सामान तरीके से कभी भी उसे दोबारा पीस नहीं पाओगे। क्योंकि जो 52 पत्ते होते हैं, उनको पीसने की सम्भावना 52! फैक्टोरियल (क्रमचय) होती है। मतलब 8.066*10^67 होती है। यह इतना बड़ा नंबर है, कि आप को 8 पर 67 बार शून्य (8000000000000.......) लगाने पड़ेंगे।
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