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(1) प्रस्तावना -
मोरों का वनों में नृत्य, पक्षियों की अनन्त आकाश में उड़ान तथा बालकों का उछलना-कूदना तथा दौड़ लगाना आदि क्रियाएँ खेल के प्रति रुचि का प्रदर्शन करने वाली हैं। मानव ही नहीं पशु तथा पक्षी भी इसके अपवाद नहीं हैं। मानव जीवन में भी खेलों का विशेष महत्त्व है। बाल्यावस्था से ही नट-खट मानव के लिए खेल मनोरंजन, स्वास्थ्य एवं विकास का आधार तैयार करते हैं।
| जीवन में खेलों का महत्त्व। |
(2) खेलों की उपयोगिता -
खेल मानव स्वभाव का अपरिहार्य अंग हैं। खेल मन तथा तन दोनों को ही स्वस्थ बनाते हैं। मानसिक तनाव एवं शारीरिक रोगों से छुटकारा दिलाने में खेल-कूद बड़े सहायक बनते हैं। प्रसन्न एवं सुखद जीवन के लिए आवश्यक है कि हम कार्य तथा खेल का सामंजस्य स्थापित करके चलें -
“Work while you work, play while you play, That is the way, to be happy and gay."
अर्थात् खेल की आवश्यकता जीवन के कार्य-कलापों के साथ जुड़ी हुई है। विद्यार्थी जीवन में खेल और अधिक उपयोगी हैं। 'स्वस्थ तन में ही स्वस्थ मस्तिष्क' होता है कहावत सहज ही छात्रों को खेलों के प्रति जागरूक बनाती है।
खेल, व्यायाम के साधन होने के साथ-साथ अच्छे नागरिकों के निर्माण में भी सहयोगी हैं। अच्छे खिलाड़ी में सच्चरित्रता, नैतिकता तथा अनुशासन आदि सद्गुणों का विकास होता है। इससे समाज-सेवा तथा उपकार भावना का भी उदय होता है और आत्म-विश्वास तथा स्वावलम्बन को सद्वृत्ति को बल प्राप्त होता है।
खेलों में रुचि रखने वाला हार-जीत को समभाव से स्वीकारता है और परोपकार का भाव उसके आचरण में बना रहता है। खेल राष्ट्रीय भावना को प्रोत्साहित करते हैं, अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर राष्ट्र-सम्मान की रक्षा करते हैं। बालीबाल, फुटबाल, हॉकी, क्रिकेट, बैडमिंटन आदि खेल आज के युग में अन्तर्राष्ट्रीय महत्त्व प्राप्त कर चुके हैं तथा इनके खिलाड़ी ख्याति के साथ-साथ द्रव्योपार्जन भी करते हैं। खेलों से भावात्मक एकता को बल मिलता है और अच्छे खिलाड़ियों के लिए 'वसुधैव कुटुम्बकम्' का स्वप्न साकार होता है।
(3) खेलों का महत्व -
खेलों का महत्व जीवन के कई आयामों से जुड़ा होता है और यह हमारे शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यहां विस्तार से जीवन में खेलों के महत्त्व के कुछ पहलुओं को विवरण किया गया है:
• शारीरिक स्वास्थ्य और रोग प्रतिरोधक क्षमता: खेलना शारीरिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करता है और स्वास्थ्यवर्धक लाभ प्रदान करता है। नियमित खेलने से हृदय-रक्तसंचार सुधरता है, मोटापे से बचाव होता है, ताकत और सहनशीलता बढ़ती है और रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है।
• मानसिक स्वास्थ्य और तनाव का कम होना: खेलना मनोविज्ञानिक रूप से दिमाग के लिए लाभकारी होता है। यह तनाव को कम करने, मनोभावना को सुधारने, आत्मविश्वास को बढ़ाने और मनोदशा को सुधारने में मदद करता है। खेलने से आनंद, उत्साह और मनोरंजन का आनंद मिलता है जो मनोबल को बढ़ाता है।
• स्वतंत्रता का अनुभव: खेलना हमें स्वतंत्रता का अनुभव कराता है। खेल के दौरान हमें स्वतंत्र रूप से निर्णय लेने, क्रिएटिविटी को प्रकट करने, अपनी क्षमताओं को आवश्यकतानुसार उपयोग करने और समस्याओं का समाधान करने का मौका मिलता है। यह हमारे आत्मविश्वास को बढ़ाता है और हमें स्वतंत्रता की भावना से जुड़े रखता है।
• टीमवर्क और सहकारिता: खेलों में टीमवर्क और सहकारिता का महत्त्व होता है। एकांतवादी होने के बजाय, खेलने के दौरान हम दूसरों के साथ मिलकर काम करना सीखते हैं। यह हमारे सामाजिक कौशल को सुधारता है, सहयोग की भावना पैदा करता है और ग्रुप डायनामिक्स को समझने में मदद करता है।
• नैतिकता और नियमों का पालन: खेलों में नैतिकता और नियमों का महत्त्व होता है। खेल के नियमों का पालन करना हमें न्याय, सम्मान, और निष्ठा की महत्ता को समझाता है। यह हमें अनुशासन में रहने, स्वाधीनता की सीमाओं को समझने और नैतिक मूल्यों को समझने में मदद करता है।
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