खेलों की उपयोगिता एवं महत्ता

1.प्रस्तावना -

एक समय था, जब हमारे माता-पिता और गुरु कहते थे -" खेलोगे कूदोगे होंगे खराब, पढ़ोगे लिखोगे होगे नवाब।"

आज यह धारणा बदल चुकी है। आज शिक्षित माता-पिता के बच्चे उन स्कूलों में अधिक पढ़ते हैं,जिनमें खेल-खेल में शिक्षा देने का प्रबन्ध होता है। आज दुनिया में खेलों की उपयोगिता और महत्ता को अच्छी तरह से जाना और माना गया है। आज खेल केरियर (भविष्य) से जुड़ गया है। खिलाड़ी होना गौरव की बात समझी जाने लगी है। वैसे भी देखा जाए तो खेलों के बिना जीवन जड़वत् है।

समय बिताने, शरीर को स्वस्थ रखने तथा मन बहलाने का सर्वोत्तम साधन खेल ही तो है। जीवन के दायित्व के निर्वाह की शिक्षा खेलों से ही तो मिलती है। खेलमय जीवन ही जाग्रति है, उत्थान है। खेल व्यायाम का मुख्य अंग है। स्वस्थ शरीर खेलों की ही देन हैं। पूर्वजों का कहना हैं- 'पहला सुख नीरोगी काया' ।

नीरोगी काया के लिए खेल परम आवश्यक हैं। जीवन में आत्मविश्वास उत्पन्न करने का काम खेल ही तो करते हैं। स्पष्ट है- मानव का सम्पूर्ण जीवन खेलों से प्रभावित रहता है।

खेलों की उपयोगिता एवं महत्ता
खेलों की उपयोगिता एवं महत्व


2.खेलों के प्रकार - खेल तीन प्रकार के हैं-
 (1) मनोविनोद के खेल, 
(2) व्यायाम के खेल और 
(3) धनोपार्जन के खेल ।

मनोविनोद या मनोरंजन के खेलों में ताश, शतरंज, कैरमबोर्ड, साँप-सीढ़ी, जादुई करिश्में आदि गिने जाते हैं।

व्यायाम के खेलों में एथलेटिक्स, कुश्ती, निशानेबाजी, नौकायन, डोंगीचालन, घूँसेबाजी (बॉक्सिंग), भारोत्तोलन (वेटलिफ्टिंग), साइक्लिंग, जूड़ो, अश्वारोहण, तीरंदाजी, हॉकी, वालीबाल, हैंडबाल, फुटबाल, टेनिस, टेबलटेनिस, क्रिकेट, खो-खो, कबड्डी आदि गण्य हैं ।

धनोपार्जन के खेलों में जादू के खेल, सर्कस के खेल, अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर खेले जाने वाले मैच आदि होते हैं। मनोरंजन के खेलों से मानसिक व्यायाम होता है। इनसे मानसिक थकावट दूर होती है। नयी स्फूर्ति मिलती है। नयी स्फूर्ति से संकल्प शक्ति बढ़ती है।

व्यायाम के खेलों से शरीर पुष्ट, स्वस्थ और बलवान बनता है। शरीर में स्फूर्ति और मन में उत्साह बना रहता है ।

धनोपार्जन के खेलों से धनोपार्जन के साथ ही यश भी मिलता है। राष्ट्र को गौरव मिलता है। प्रत्येक राष्ट्र अपने श्रेष्ठ खिलाड़ियों पर गर्व का अनुभव करता है।

3.खेलों की उपयोगिता एवं महत्ता -

खेलों की उपयोगिता एवं महत्ता से कदापि इंकार नहीं किया जा सकता। खेल हमें जीवन में संघर्ष करने और सफलता प्राप्ति की शिक्षा देते हैं। कठिनाइयों पर हँसते-हँसते विजय प्राप्त करने का गुण उत्पन्न करते हैं। जीवन में अनुशासन की शिक्षा खेलों से ही प्राप्त होती है। अनुशासन में रहकर साथियों के साथ पूर्ण सहयोग करने का भाव खेलों से ही आता है।

कारण, अनुशासन में और सहयोग के बिना खेल चल ही नहीं सकते। खेलों से ही मनुष्य में पूर्ण तन्मयता से कार्य करने की लगन उत्पन्न होती है। उसमें खेल-भावना का विकास होता है। खेलने में चोट लग जाती है, इससे व्यक्ति में सहनशीलता के गुण का विकास होता है। छोटे बच्चे खेल-खेल में जीवन के विकास और शिक्षा की कई बातें सीख जाते हैं। शिक्षा और खेल दोनों का चोली-दामन का सम्बन्ध है ।

4.सावधानियाँ -

यह माना कि कुछ खेल हानिकारक भी हो सकते हैं, जैसे- बॉक्सिंग, मोटर-रेस आदि । कबड्डी, फुटबॉल, हॉकी, क्रिकेट, गुल्ली-डण्डा, कुश्ती जैसे खेलों में तनिक-सी असावधानी से खिलाड़ी को कभी-कभी काफी चोट लग जाती है।

ताश, शतरंज, चौपड़ आदि खेलों को जुए के रूप में खेलने से व्यक्ति स्वयं उसका परिवार और समाज के लिए अभिशाप बन जाता है। कुछ खेल व्यक्ति के लिए आदत बन जाते हैं । इससे समय की बर्बादी होती है और आर्थिकत हानि उठानी पड़ती है। अतः खेल खेलें, परन्तु उनके दुरुपयोग से सावधान रहें।


5. उपसंहार -

छात्रों को खेल के महत्व को अच्छी तरह से समझना चाहिए। उन्हें ध्यान में रखना चाहिए कि स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क निवास करता है। छात्रावस्था जीवन-निर्माण की वेला है। इस अवस्था में व्यक्ति पर जो संस्कार पड़ जाते हैं, वे जीवनभर अपना प्रभाव दिखाते हैं। एक बात विद्यार्थियों को मंत्र के समान विशेष रूप से याद रखनी चाहिए

"All work and no play, makes Jack a dull boy. " 
अर्थात् खेल के अभाव में होशियार छात्र भी मूर्ख बन जाता है। अतः एक अच्छे विद्यार्थी के लिए खेलना उतना ही आवश्यक है, जितना अध्ययन करना

भारत एक निर्धन देश है। यहाँ स्कूलों, कॉलेजों एवं विश्वविद्यालयों में पाश्चात्य एवं महँगे खेलों की समुचित व्यवस्था सम्भव नहीं है। शासन को इस सम्बन्ध में ध्यान देकर शिक्षा के साथ खेल-व्यवस्था पर खर्च की राशि बढ़ाना चाहिए।

स्वदेशी खेलों को भी बढ़ावा देना चाहिए। अच्छे खिलाड़ियों को आर्थिक सहयोग दिया जाना चाहिए। स्पर्द्धाओं में भेजे जाने वाले खिलाड़ियों का उनकी योग्यता के आधार पर निष्पक्षता से चयन किया जाना चाहिए। तभी भारतवर्ष खेल-जगत् में सुयश प्राप्त कर सकता है।

टिप्पणियाँ